भगवान तो भाव के भूखे होते  : पंडित अशोक तिवारी

# Admin | 12 Feb, 2024

भगवान तो भाव के भूखे होते  : पंडित अशोक तिवारी


मिशन क्रांति न्यूज़,जांजगीर- चाम्पा। यह जीव चाहे शत्रुता हो या मित्रता जिस भी भाव से भगवान को याद करेगा या उनके पास जाएगा तो प्रभु उसे अपना ही लेते हैं और उनको गति मुक्ति प्रदान करते हैं - ऊक्त बातें  ब्यास पीठ से पं अशोक तिवारी ने भागवत कथा के पांचवें दिन पूतना उद्धार की कथा प्रसंग सुनाते हुए कहे । उन्होंने बताया कि पूतना एक अविद्या है  अज्ञानता है जो व्यक्ति के 14 स्थानों पर  रहता है और मन में विकार उतपन्न करता है ।

पर यह जीव जब प्रभु की शरणागति स्वीकारता है तो इनसे छुटकारा मिल जाती है। कथा के पांचवें दिन उन्होंने बालकृष्ण के बाललीला का सुंदर वयाख्या किये और कथा प्रसंग के रहस्यों को बताए। यह पूतना पूर्व जन्म में रत्नमाला थी राजा बलि की बेटी  जब भगवान वामन रूप में बलि के दरवाजे पर आए तो उनकी सुंदर छबि को देखकर रत्नमाला मन ही मन कहने लगी काश ऐसे पुत्र मेरे होते हो उसे अपना स्तनपान कराती तो भगवान तथास्तु बोलकर आशीर्वाद दिए थे फिर जब बामन से विराट रूप बने तो रत्नमाला कहने लगी ऐसे पुत्र को तो मैं जहर देकर मार डालती भगवान में उनकी दोनों बातें मानी यही रत्नमाला द्वापरयुग में पूतना बनकर भगवान कृष्ण को स्तनपान कराई। भगवान ने विभिन्न असुरों को उनको पूर्व जन्म में दिए गये श्राप को पूर्ण करने के लिए मारकर उनको मुक्ति प्रदान किये। गोवर्धन लीला के प्रसंग की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि  भगवान इंद्र के अभिमान को समाप्त करने के लिए   एक नई परम्परा की शुरुआत करते हुए गोवर्धन पहाड़ की पूजा कराए। लेकिन जब वर्षा रूपी समस्या आई तो उनके साथ खड़े रहे । इसलिए जो दुख में साथ दे वह भगवान है और सुख में साथ देने वाला जीव है। कथा के बीच - बीच मे सुंदर भजनों के माध्यम से उपस्थित श्रोताओं को मंत्र मुग्ध करते रहे। इस अवसर बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

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