जय श्रीराम के नारे आज अयोध्या में ही नही पूरे विश्व में गूंज रहे ◆ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में विधिवत भूमि पूजन के बाद मंदिर निर्माण के लिए पहली ईंट रखी

# Admin | 05 Aug, 2020

जय श्रीराम के नारे आज अयोध्या में ही नही पूरे विश्व में गूंज रहे

◆ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में विधिवत भूमि पूजन के बाद मंदिर निर्माण के लिए पहली ईंट रखी

मिशन क्रांति न्यूज. ब्यूरो। राम की नगरी अयोध्या में कई सालों तक अदालत में मामला चलने के बाद आखिरकार आज अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रख दी गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अयोध्या में विधिवत भूमि पूजन के बाद मंदिर निर्माण के लिए पहली ईंट रखी.  अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी बोले, 'आज भी भारत के बाहर दर्जनों ऐसे देश हैं जहां, वहां की भाषा में रामकथा, आज भी प्रचलित है.' अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित किया. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के कई देशों में अलग-अलग रूपों में भगवान राम मौजूद हैं. पीएम मोदी ने कहा कि जय सिया राम के नारे आज सिर्फ अयोध्या में नहीं बल्कि पूरे विश्व में गूंज रहे हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की आस्था में राम हैं, भारत के आदर्शों में राम हैं. भारत की दिव्यता में राम हैं, भारत के दर्शन में राम हैं. पीएम मोदी ने कहा, 'आज भी भारत के बाहर दर्जनों ऐसे देश हैं जहां, वहां की भाषा में रामकथा, आज भी प्रचलित है. मुझे विश्वास है कि आज इन देशों में भी करोड़ों लोगों को राम मंदिर के निर्माण का काम शुरू होने से बहुत सुखद अनुभूति हो रही होगी. हजारों साल पहले वाल्मीकि की रामायण में जो राम प्राचीन भारत का पथप्रदर्शन कर रहे थे, जो राम मध्ययुग में तुलसी, कबीर और नानक के जरिए भारत को बल दे रहे थे, वही राम आज़ादी की लड़ाई के समय बापू के भजनों में अहिंसा और सत्याग्रह की शक्ति बनकर मौजूद थे.' पीएम मोदी ने कहा कि जीवन का ऐसा कोई पहलू नहीं है, जहां हमारे राम प्रेरणा न देते हों. भारत की ऐसी कोई भावना नहीं है जिसमें प्रभु राम झलकते न हों. भारत की आस्था में राम हैं, भारत के आदर्शों में राम हैं! भारत की दिव्यता में राम हैं, भारत के दर्शन में राम हैं. उन्होंने कहा कि इस मंदिर के साथ सिर्फ नया इतिहास ही नहीं रचा जा रहा, बल्कि इतिहास खुद को दोहरा भी रहा है. जिस तरह गिलहरी से लेकर वानर और केवट से लेकर वनवासी बंधुओं को भगवान राम की विजय का माध्यम बनने का सौभाग्य मिला.

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