"प्रेस से मिलिए"कार्यक्रम में आई जी रतन लाल डांगी ने "पत्रकारों" से की खुलकर चर्चा

# Admin | 18 Nov, 2021

"प्रेस से मिलिए"कार्यक्रम में आई जी रतन लाल डांगी ने "पत्रकारों" से की खुलकर चर्चा

◆  कार्यक्रम में जिले के पुलिस कप्तान भी बने सहभागी।

मिशन क्रांति न्यूज. जांजगीर-चाम्पा। बिलासपुर रेंज आईजी रतन लाल डांगी पत्रकार परिवार द्वारा आयोजित "प्रेस से मिलिए" कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। उनके साथ जिले के एस पी प्रशांत सिंह ठाकुर भी सहभागी रहे। पत्रकारों से चर्चा के दौरान आई जी ने प्रारंभिक जीवन की कठिनाइयो पर विचार साझा करते हुए कहा कि सफलता पर जन्मसिद्ध अधिकार है इसके लिए लगातार प्रयत्न आवश्यक है । राजस्थान के नागौर के समीप एक छोटे से गांव से मेरा सफर आरंभ हुआ और आज छत्तीसगढ़ मेरी कर्मभूमि है , श्री त्यागी ने बताया कि सख्त जीवन से मजबूती आई , मजदूर परिवार में जन्म हुआ , तपते रेगिस्तानी ईलाके में नंगे पांव स्कूलिंग हुई , कम उम्र में ही शादी हुई और परिवार चलाने के लिए शिक्षक की नौकरी की। कुछ कर दिखाने की चाहत और जीतोड़ परिश्रम की सीख ने गति बनाए रखी , सेल टैक्स अफसर ,तहसीलदार बनना पड़ाव रहे ,चौथे प्रयास में यूपीएस सी में सफलता मिली और आईपीएस के रुप में राजस्थान से छत्तीसगढ़ पहुंचे , 2003 बैच के डांगी छत्तीसगढ़ के 23 जिलों में सक्रिय पुलिसिंग कर चुके हैं । आई जी ने इसके पुर्व कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती के छाया चित्र पर दीप प्रज्जवलन किया , वरिष्ठ पत्रकार उपेन्द्र तिवारी और अश्वनी सिंह ने आई जी की अगवानी की , पत्रकारों की ओर से राजेश मोदी , डायमंड शुक्ला , रोहित चतुर्वेदी , मनोज थवाईत , हरि अग्रवाल , कैलाश कश्यप ने स्वागत किया । कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रकाश शर्मा ने अतिथि का शायराना परिचय इस अंदाज में दिया कि कार्यक्रम जीवंत हो गया , कार्यक्रम से अतिथि का परिचय संस्कार द्विवेदी ने कराया, गोपाल शर्मा ने श्री डांगी की कार्यशैली पर अपनी यादें ताजा की , आभार डायमंड शुक्ला ने प्रगट किया।

सिर्फ  मार्गदर्शन नहीं बल्कि आगे बढ़कर नेतृत्व करें

कार्यक्रम में आई जी ने जीवन और कार्यस्थलों का विस्तृत विवरण देते हुए कहा कि ये समय पीछे बैठकर मार्गदर्शन करने का नहीं है बल्कि आगे बढ़कर नेतृत्व कर सकारात्मक परिणाम देने का है । अपने अन्य रुचियों के विषय में डांगी ने कहा कि अध्ययन और योग उनके पसंदीदा कार्य हैं , दो गैलेन्ट्री अवार्ड जीत चुके डांगी पुरुस्कार से हर वर्ष मिलने वाली संपूर्ण राशि से पुस्तकालयों और जरुरतमंद प्रतिभाशाली युवाओं की मदद करते हैं।

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