पत्रकारों के खिलाफ झूठे आरोफ मढ़कर फर्जी अपराध दर्ज करना चौथे स्तंभ को कमजोर करने की साजिश...!!!

# Admin | 13 Apr, 2022

पत्रकारों के खिलाफ झूठे आरोफ मढ़कर फर्जी अपराध दर्ज करना चौथे स्तंभ को कमजोर करने की साजिश...!!!

संपादकीय ◆

★ डायमंड शुक्ला , प्रधान संपादक

मिशन क्रांति न्यूज.

मिशन क्रांति न्यूज. जांजगीर-चाम्पा। वर्तमान में देश के अलग - अलग राज्यों में जिस तरह पुलिस प्रशासन पत्रकारों को टारगेट कर उनके खिलाफ झूठे आरोफ मढ़कर अपराध पंजीबद्ध कर रही है, यह चौथा स्तंभ को कमजोर करने की साजिश है। भ्रष्टाचार में संलिप्त नेता,अफसर, भूमाफिया और ठेकेदारों के कालेकारनामे को पत्रकार उजागर करता है सच सामने लाता है ,जिससे तिलमिलाए रसूखदार भ्रष्ट लोग पुलिस प्रशासन को गुमराह करते हुए झूठे आरोफ मढ़कर पत्रकार के खिलाफ अपराध दर्ज कराने आमादा रहते हैं और बेगुनाह होते हुए भी पत्रकार को सलाखों के पीछे धकेल देते हैं

ऐसा ही मामला मध्यप्रदेश के सीधी जिले का है, जहां पत्रकारों के साथ बदसलूकी करते हुए उनके कपड़े उतरवा लिए गए। वहीं छत्तीसगढ के सूरजपुर जिले में एक पत्रकार के खिलाफ फर्जी मामले में अपराध पंजीबद्ध कर सलाखों के पीछे धकेल दिया गया। अफसोस इस बात का है कि भ्रष्टाचार में संलिप्त ऐसे लोग पुलिस का सहारा लेकर साजिश के तहत पत्रकार को सलाखों के पीछे पहुंचाने सफल भी हो जाते हैं...भ्रष्टाचार में संलिप्त अथवा काले कारनामे करने वाले ऐसे रसूखदार लोग पत्रकारों द्वारा पैसे की मांग, अथवा धमकाने का आरोफ लगाते हैं...पुलिस अगर चाहती तो सही तथ्यों की जांचकर वैधानिक कार्रवाई पर जोर देती लेकिन ज्यादातर मामलों में पुलिस का रवैया पत्रकारों के प्रति सही नही रहता...पुलिस प्रशासन की दुर्भावना के शिकारग्रस्त पत्रकार झूठे मामले में सलाखों के पीछे धकेल दिए जाते हैं...अब सवाल यह उठता है कि पत्रकार सच उजागर ना करे...? पत्रकार वह दिखाए ....जो भ्रष्टाचार में संलिप्त नेता,अधिकारी और भूमाफिया चाहते हैं...? जिससे जनता को सच मालूम ना हो और आपसी मिलीभगत से सरकारी खजाने खाली कर ले। पत्रकार वही जो झूठ का पर्दाफाश कर सच सामने लाए... अफसोस आजकल पुलिस को यह नागवार गुजर रहा है शायद यही वजह है कि पुलिस पत्रकारों के पीछे हाथ धोकर पीछे पड़ी है...सवाल यह भी है कि पुलिस आखिरकार पत्रकारों से चिढ़ते क्यों हैं... सिर्फ इसलिए कि वे तीखे सवालात करते हैं... सच उजागर करने सवालों की बौछार करते हैं... सच तो आखिर सच रहेगा...ना पुलिस दबा सकती है ना पत्रकार...बस अफसोस इस बात का है कि पुलिस का रवैया पत्रकारों के प्रति कुछ ठीक नही है...यह रवैया बदलना चाहिए...पत्रकारों को पुलिस प्रशासन का साथ मिलना चाहिए...हम यह कतई नहीं कहते कि पत्रकार अगर गलत करे ...अवैधानिक काम करे तो उन्हें बख्श दो... पर हां अगर खबरों से बौखलाए,तिलमिलाए भ्रष्ट लोगों के फर्जी दस्तावेज अथवा बयान के आधार पर अपराध पंजीबद्ध हो तो यह कतई उचित नहीं है...ना तो चौथा स्तम्भ के लिए और ना ही लोकतंत्र और राष्ट्र के लिए... गुजारिश है न्यापालिका से जहां...

सबको इंसाफ मिलता है,जहां सच ...सच रहता है और झूठ...हमेशा झूठ... इसलिए...जब भी "पत्रकारों" के खिलाफ अपराध दर्ज हो...तो न्यायिक जांच के बाद हो...ताकि पुलिस वर्दी की आड़ में कानून के साथ खिलवाड़ ना कर सके... और चौथा स्तंभ की साख कमजोर ना हो और पत्रकारिता को संबल मिले...और पत्रकार सच उजागर कर सके बेखौफ।

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