सरकारी जमीन पर एक ही रात में मकान बनाकर दरवाजा पर जड़ देते हैं ताला

# Admin | 13 Sep, 2020

सरकारी जमीन पर एक ही रात में मकान बनाकर दरवाजा पर जड़ देते हैं ताला !

◆  बेजाकब्जा करने नया तरीका अख्तियार कर रहे लोग ।◆ कार्रवाई के नाम पर राजस्व अमला कर रही सिर्फ खानापूर्ति।

◆ बेजाकब्जाधारियों के हौसले बुलंद,,विभाग को खुली चुनौती।

◆ मामला नवागढ़ ब्लाक के राछाभांठा का।

मिशन क्रांति न्यूज. जांजगीर-चाम्पा। नवागढ़ ब्लाक के राछाभाठा के सड़क से लगे सरकारी जमीन पर बेजाकब्जा धड़ल्ले से जारी है लेेेकिन अब लोग कब्जा का नया तरीका अख्तियार करने लगे हैैंं जहां अब मकान दिन की बजाय एक ही रात में निर्माण कर दरवाजा पर ताला जड़ देते हैं, इतना ही नहीं नवनिर्मित मकान वे बकायदा एक घाट और कुछ बर्तन भी रख दिया जाता है ताकि देखने मे ऐसा लगे कि वे उक्त मकान में वे लंबे समय से रह रहे हों। बेजाकब्जाधारी पूरी रणनीति के तहत सरकारी जमीन को हथियाने में लगे हैं। वहीं राजस्व अमला कभी कभी शिकायत मिलने पर चंद सरकारी जमीन पर बने मकान ढहाकर कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं, ऐसे में बेजाकब्जाधारी सब भर भारी पड़ रहे हैं। सरकार बेजाकब्जा हटाने पूरी तरह विफल है क्योंकि सरकारी जमीन से बेदखली की कार्रवाई टेढ़ी खीर साबित हो गई है इसका सबसे बड़ा कारण जहां हर गांव में बेजाकब्जा की बाढ़ सी आ गई है। ज्यादातर मकान बेजाकब्जा में निर्मित है ऐसे में सब पर कार्रवाई कर पाना संभव नही है इससे कई बार हुए शासन प्रशासन को मुंह की खानी पड़ती है, शायद यही वजह है कि प्रशासनिक अमला भी बेजाकब्जा से बेदखल करने पर ज्यादा ध्यान नही देती है। वहीं दूसरी ओर कि शासन के पास कोई ठोस रणनीति ही नही है। ऐसे में इसका दुष्परिणाम यह है कि हर गांव, कस्बा और शहरों मे बेजा कब्जा से धड़ल्ले से मकान निर्माण किया जा रहा है खासकर मुख्य मार्ग वाले सड़क से लगे सरकारी जमीन पर बेजाकब्जाधारियों की पैनी नजर है । राछाभाठा मे भी कुछ इसी तरह बेजाकब्जा का खेल धड़ल्ले से जारी है। यहां यह बताना लाजमी होगा कि राछाभांठा में सड़क किनारे बने ज्यादातर मकान सरकारी जमीन पर बेजाकब्जा कर बनाए गए हैं। हालांकि सरकारी जमीन से बेदखली की कार्रवाही कई बार की जा चुकी है लेकिन परिणाम शुन्य है क्योंकि मकान पुन: बना लिया जाता है जिसे देखकर सभी सरकारी जमीन अब बेजाकब्जाधारियों का कब्जा है और यह सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है बल्कि हर रोज सरकारी जमीन पर एक नए मकान बनाकर प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं और प्रशासन मौन है।

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